Chhor Fikr Duniya Ki Chal Madine Chalte Hain Naat Lyrics In Hindi
छोड़ फ़िक्र दुनिया की चल मदीने चलते हैं
मुस्तफ़ा ग़ुलामों की क़िस्मतें बदलते हैं
रहमतों के बादल के साए साथ चलते हैं
मुस्तफ़ा के दीवाने घर से जब निकलते हैं
हमको रोज़ मिलता है सदका प्यारे आक़ा का
उनके दर के टुकड़ों पर हम खुशनसीब पलते हैं
आमिना के प्यारे का सब्ज़ गुम्बद वाले का
जश्न हम मनाते हैं जलने वाले जलते हैं
सिर्फ सारी दुनिया में तैबा की वोह गलियां हैं
जिस जगह पर हम जैसे खोटे सिक्के चलते हैं
सच है ग़ैर का एहसान वोह कभी नहीं लेते
ऐ अलीम आक़ा के टुकड़ों पे जो पलते हैं
छोड़ फ़िक्र दुनिया की चल मदीने चलते हैं
मुस्तफ़ा ग़ुलामों की क़िस्मतें बदलते हैं
शायर: अलीम रज़ा
नातख्वां: ओवैस रज़ा कादरी, अहमद रज़ा क़ादरी, मुशाहिद रज़ा वाहिदी आदि।



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