Naate Mustafa Sunkar Rooh Jab Machalti Hai Lyrics In Hindi
नाते मुस्तफा सुन कर रूह जब मचलती है
आशिकों के चेहरे से चाँदनी निकलती है
उनके सदक़े खाते हैं, उनके सदक़े पीते हैं
मुस्तफा की चौखट से क़ायनात पलती है
थाम कर शहे दीं की रहमतों की ऊँगली को
जन्नते महोब्बत में ज़िन्दगी टहलती है
काश वो नज़र आते ख्वाब के दरीचे से
मेरी दीदा-इ-हसरत पहेरो आँख मलती है
लफ़्ज़े कुन्न के जलवे में मुस्तफा का जलवा है
नूरे मुस्तफ़ाई में क़ायनात ढलती है
शायर: असद इक़बाल
नातख्वां: असद इक़बाल



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