Ye Zindagi Ka Ilahi Nizam Ho Jaye Naat Lyrics in Hindi | Mushahid Raza Wahidi
Ye Zindagi Ka Ilahi Nizam Ho Jaye Lyrics Naat in Hindi
ये ज़िन्दगी का इलाही निज़ाम हो जाए
सह़र हो मक्के में तैयबा में शाम हो जाए।
हूं दूर, दर से ही मेरा काम हो जाए
अदब से सर को झुका लूं सलाम हो जाए।
इस इल्तिफ़ात के क़ाबिल ग़ुलाम हो जाए
जहां क़याम है उनका, क़याम हो जाए।
नज़र उठे तो नज़र आएं आपके जल्वे
मेरे सुकून का ये एहतमाम हो जाए।
शरफ़ नसीब हो हर एक शब हुज़ूरी का
हुज़ूर ﷺ ख़ास करम मुझपे आ़म हो जाए।
जो इल्तिफ़ात हो गर रहमत-ए-मुजस्सम ﷺ का
न जाने क्या ख़लिश-ए-ना-तमाम हो जाए।
अगर बुला के दिखा दें जमाल भी अपना
तमाम हिज्र का क़िस्सा तमाम हो जाए।
अगर वो दामन-ए-रहमत इन्हें मयस्सर हो
इन आंसुओं का मुरत्तब निज़ाम हो जाए।
बग़ैर इश्क़-ए-मोहम्मदﷺ ये ज़िंदगी क्या है
ख़ुदा गवाह इबादत हराम हो जाए।
मिले जो मेहर-ए-रिसालत ﷺ के हुस्न का सदक़ा
ह़क़ीर ज़र्रा भी माह-ए-तमाम हो जाए।
हुज़ूर ﷺ आप हैं वह नुक्त़ा-ए-उ़रूज-ए-कमाल
नबूवतों का जहां इख़्तिताम हो जाए।
वोह सर झुकाएगा उतना ही उनकी चौखट पर
बुलंद जिसका जहां तक मक़ाम हो जाए।
मेरी नज़र में वसीलों की क़द्र-ओ-क़ीमत है
किसी का नाम भी हो मेरा काम हो जाए।
जो आंख बख़्शी तो दीदार का शरफ़ बख़्शें
ये इल्तिफ़ात भी ख़ैरुल-अनाम ﷺ हो जाए।
अगर ख़ुलूस मिले ज़ौक़-ए-नात-गोयी का
मेरी निजात का बाइ़स कलाम हो जाए।
न देख ज़ाद-ए-सफ़र की कमी को ऐ ख़ालिद
करम हो उनका तो सब इन्तिज़ाम हो जाए।
शायर: खालिद मेहमूद खालिद
नातख्वां: मुशाहिद रज़ा वाहिदी
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